सोमवार, 22 मार्च 2010

जल है तो कल है




जल है तो फिर कल है भैया
अब तो समझ जाओ यह बात
पानी से ही है जिंदगानी
सदा याद रखो यह बात

सूख रहे जल स्रोतों को अब
मिलकर हमें बचाना होगा
मुरझा रहे पेड़ पौधों को
हरा-भरा भी करना होगा
जल संरक्षण से आज जुड़े तो
जीवन भर पायेंगे सौगात

बूँद एक भी व्यर्थ न जाए
अनमोल धरा यह खिलखिल जाए
खेत हँसे फसलें गायें
दूर परिंदे भी मुस्काएं
पानी का सम्मान करें सब
तभी बनेगी बिगड़ी बात

निर्मल नीर सुलभ हो सबको
जल के लिए लड़ाई न अब हो
ताल तलैय्या भरें लबालब
एक दूजे के प्रति अदब हो
आज अगर चेते तो
बिखरेंगी खुशियाँ दिन रात

जल है तो फिर कल है भैया
अब तो समझ जाओ यह बात
पानी से ही है जिंदगानी
सदा याद रखो यह बात



1 टिप्पणी:

  1. पानी से ही है जिंदगानी...
    बहुत बढिया.

    जाने नवरात्रे के बारे मे ruma-power.blogspot.com पर

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